

सोजत न्यूज़ | सच कहने का दम वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश बोराणा
सोजत सिटी। बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश लेकर आए विजयादशमी पर्व पर मेहंदी नगरी सोजत सिटी में दशहरा महोत्सव श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। स्थानीय मेला चौक स्थित रावण चबूतरे पर हजारों लोगों की मौजूदगी में करीब 50 फीट ऊंचे दशानन के पुतले का दहन किया गया। जैसे ही भगवान श्रीराम के हाथों से छोड़ा गया जलता हुआ तीर रावण के पुतले पर लगा, वैसे ही पूरा मेला चौक जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कुछ ही पलों में रावण का पुतला आग की लपटों में घिर गया और लगभग 50 सेकंड में जलकर खाक हो गया।
रावण दहन के साथ ही आसमान में रंग-बिरंगी आतिशबाजी का शानदार नजारा दिखाई दिया। करीब एक घंटे तक चली आतिशबाजी ने दशहरा महोत्सव की रौनक बढ़ा दी। आसमान में बिखरती रंगीन रोशनी और मैदान में गूंजते जयकारों के बीच हजारों लोगों ने भगवान श्रीराम की विजय के इस प्रतीकात्मक प्रसंग को उत्साह के साथ देखा। पूरा वातावरण धार्मिक उमंग और उल्लास से सराबोर नजर आया।
नरसिंह द्वारा मंदिर से निकली भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा
दशहरा महोत्सव की शुरुआत सोजत सिटी के स्थानीय नरसिंह द्वारा मंदिर से निकली भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। शोभायात्रा में वानर सेना भी शामिल रही। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ट्रैक्टर पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। धार्मिक वेशभूषा में सजे पात्रों और वानर सेना की मौजूदगी ने शोभायात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
शोभायात्रा नरसिंहद्वारा मंदिरसे रवाना होकर धान मंडी, सब्जी मंडी, मेन बाजार, राजपाल गेट और महावीर सर्कल सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मेला चौक पहुंची। मार्ग में धार्मिक आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल रहा। भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ती रही और मेला चौक पहुंचने पर दशहरा महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया।
अशोक वाटिका में वानर सेना की उछल-कूद, रामायण के प्रसंगों ने बांधा समां
मेला चौक में शोभायात्रा पहुंचने के बाद रामायण से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया। हनुमानजी के सानिध्य में वानर सेना ने अशोक वाटिका में जमकर उछल-कूद की। इस दृश्य ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रामायण के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने से आयोजन में धार्मिक और सांस्कृतिक रंग देखने को मिला।
भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और वानर सेना के पात्रों की प्रस्तुति ने दशहरा महोत्सव को विशेष पहचान दी। उपस्थित लोगों ने उत्सुकता के साथ इन प्रसंगों को देखा। आयोजन ने नई पीढ़ी को भी भगवान श्रीराम की मर्यादा, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने का संदेश प्रस्तुत किया।
शक्ति आराधना के बाद हुआ दशानन पर प्रहार
दशहरा महोत्सव के दौरान परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से पूर्व भगवान श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा शक्ति की आराधना की गई। इसके बाद सभी की निगाहें रावण चबूतरे पर खड़े करीब 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले पर टिक गईं। हजारों लोग इस क्षण के साक्षी बनने के लिए मौजूद रहे।
जैसे ही भगवान श्रीराम ने जलते हुए तीर से रावण के पुतले पर प्रहार किया, पुतले में आग लग गई। कुछ ही क्षणों में आग की लपटों ने पूरे पुतले को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते करीब 50 सेकंड में रावण का पुतला जलकर खाक हो गया। इस दौरान मेला चौक जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने उत्साह के साथ दशानन दहन का दृश्य देखा।
रावण दहन के तुरंत बाद शुरू हुई आतिशबाजी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। करीब एक घंटे तक आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखरती रही। आतिशबाजी और रावण दहन का नजारा दशहरा महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
50 फीट के रावण का अंत, लेकिन संदेश जीवनभर के लिए
सोजत सिटी में दशानन दहन केवल एक धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि समाज को बुराइयों से दूर रहने का संदेश देने वाला आयोजन भी रहा। रावण का पुतला जलने के साथ लोगों को यह संदेश मिला कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः सत्य और धर्म का मार्ग ही आदर्श माना जाता है।
भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और न्याय का प्रतीक है। वहीं रावण दहन मनुष्य को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लालच और नकारात्मकता जैसी बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा देता है। विजयादशमी का पर्व इसी विचार को समाज तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का साक्षी बना मेला चौक
सोजत सिटी के स्थानीय मेला चौक में आयोजित दशहरा महोत्सव में भगवान श्रीराम की शोभायात्रा, वानर सेना की प्रस्तुति, शक्ति आराधना, रावण दहन और आतिशबाजी ने उत्सव को यादगार बना दिया। हजारों लोगों की मौजूदगी ने आयोजन के प्रति शहरवासियों की आस्था और उत्साह को दर्शाया।
करीब 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का कुछ ही सेकंड में जलकर खाक होना और इसके बाद लंबे समय तक चली आतिशबाजी दशहरा महोत्सव के मुख्य आकर्षण रहे। जय श्रीराम के उद्घोष के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने सोजत सिटी में धार्मिक उल्लास का वातावरण बना दिया।
संदेश स्पष्ट है—बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सत्य और धर्म की विजय का आदर्श सदैव प्रेरणा देता रहेगा।





