राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव का बिगुल: 1.15 लाख से अधिक कार्मिक करवाएंगे चुनाव, करीब 99 हजार पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात,प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा तय


सोजत न्यूज़ | वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियों और व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए महत्वपूर्ण ऐलान किए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगरीय निकाय चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं, चुनावी खर्च की सीमा, सुरक्षा व्यवस्था और आचार संहिता को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की।

चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की गई है। आयोग के अनुसार चुनाव प्रक्रिया में 1,15,255 कार्मिक अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, जबकि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदान केंद्रों की सुरक्षा के लिए 98,790 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी।

पर्यवेक्षकों की भी होगी नियुक्ति

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी। पर्यवेक्षक चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, व्यवस्थाओं और नियमों के पालन पर नजर रखेंगे। आयोग का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरा कराना है।

प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की सीमा तय

नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा भी निर्धारित की गई है। निकाय के स्तर के अनुसार प्रत्याशी अधिकतम निर्धारित राशि तक ही चुनाव प्रचार एवं अन्य चुनावी गतिविधियों पर खर्च कर सकेंगे।

नगर निगम पार्षद प्रत्याशी के लिए चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा 3 लाख रुपये तय की गई है।

नगर परिषद पार्षद प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा 2.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

वहीं नगर पालिका पार्षद प्रत्याशी अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक चुनावी खर्च कर सकेंगे।

चुनाव खर्च की सीमा तय होने से प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार और खर्च का लेखा-जोखा रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

संतान संबंधी प्रावधान हटाया गया

नगरीय निकाय चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत संतान संबंधी प्रावधानों को हटाया गया है। इससे पहले चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़े नियमों में संतान की संख्या को लेकर प्रावधान लागू था। अब इस संबंधी प्रावधान को हटा दिया गया है।

चुनाव कार्यक्रम के साथ आचार संहिता लागू

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और आचार संहिता के नियमों का पालन करना होगा।

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी मशीनरी और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े कई कार्य निर्वाचन नियमों के दायरे में आ जाएंगे। प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को प्रचार-प्रसार के दौरान भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

तबादलों पर रहेगी रोक

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सामान्य तबादलों पर भी रोक रहेगी। चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर निर्वाचन आयोग की नजर रहेगी।

सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर

नगरीय निकाय चुनाव को लेकर पुलिस बल की व्यापक तैनाती की जा रही है। करीब 98,790 पुलिसकर्मी चुनावी ड्यूटी में तैनात रहेंगे। संवेदनशील क्षेत्रों और मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग के बीच समन्वय के साथ काम किया जाएगा।

सोजत समेत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में बढ़ी चुनावी हलचल

नगरीय निकाय चुनाव कार्यक्रम को लेकर अब प्रदेशभर के नगरीय क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सोजत नगर पालिका सहित विभिन्न नगर निकायों में चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों की सक्रियता बढ़ेगी। वार्डों में संभावित प्रत्याशी जनसंपर्क, बैठकों और समर्थकों को लामबंद करने में जुट सकते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग की घोषणा के साथ ही चुनावी मैदान तैयार हो गया है। अब आने वाले दिनों में प्रत्याशियों की तस्वीर स्पष्ट होने के साथ ही स्थानीय निकायों में राजनीतिक मुकाबला और अधिक रोचक होने की उम्मीद है।

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