2026-27 के संभावित अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो को लेकर चिंता,180 से ज्यादा वैज्ञानिकों की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता,
क्या है ‘सुपर अल नीनो’ और भारत पर क्यों पड़ सकता है असर,



‘अल नीनो’ प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका प्रभाव दुनिया के विभिन्न हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। भारत में अल नीनो का संबंध अक्सर मानसून की कमजोरी, बारिश में कमी और अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियों से जोड़ा जाता है।

सितंबर 2026 में जारी वैज्ञानिकों की अपील में 188 पारिस्थितिकीविदों और शोधकर्ताओं ने 2026-27 के संभावित अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने प्राकृतिक तंत्र और उनसे जुड़े समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों की निगरानी तथा शोध को तत्काल मजबूत करने का आह्वान किया है।

भीषण गर्मी और सूखे का बढ़ सकता है खतरा

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि अल नीनो की स्थिति अत्यधिक मजबूत होती है, तो भारत के कई हिस्सों में मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

संभावित प्रभावों में शामिल हैं:

* अत्यधिक गर्मी और लंबे समय तक चलने वाली लू।

* बारिश में कमी तथा सूखे जैसी परिस्थितियां।

* कृषि क्षेत्र में पानी और मिट्टी की नमी से जुड़ी समस्याएं।

* जंगलों में आग लगने का बढ़ता जोखिम।

* प्राकृतिक जलस्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव।

हालांकि, इन प्रभावों की तीव्रता हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं होगी। वास्तविक स्थिति समुद्री तापमान, मानसूनी गतिविधियों और अन्य जलवायु कारकों पर निर्भर करेगी।

किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

भारत की बड़ी आबादी कृषि, पशुपालन और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में लंबे समय तक गर्मी, कमजोर बारिश या सूखे की स्थिति बनने पर किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के सामने चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

किसानों के सामने क्या चुनौतियां आ सकती हैं?

* फसलों के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता।

* मिट्टी में नमी बनाए रखना।

* खरीफ फसलों के बाद रबी की बुवाई की तैयारी।

* पशुओं के लिए चारा और पेयजल की व्यवस्था।

* तापमान बढ़ने पर फसल उत्पादन और कृषि लागत पर संभावित दबाव।

इन परिस्थितियों को लेकर वैज्ञानिकों ने समय रहते तैयारी और निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई है।

जंगलों में आग और पर्यावरणीय संकट की आशंका

वैज्ञानिकों की अपील में जंगलों, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों पर संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।

अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थिति में:

* जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है।

* पेड़-पौधों और वन्यजीवों पर दबाव बढ़ सकता है।

* समुद्री तापमान बढ़ने से प्रवाल भित्तियों में कोरल ब्लीचिंग की समस्या बढ़ सकती है।

* वन्यजीवों के भोजन, प्रजनन और व्यवहार में बदलाव आ सकते हैं।

* प्राकृतिक तंत्र से जुड़े ग्रामीण समुदाय प्रभावित हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया है कि केवल आपदा के बाद अध्ययन करने के बजाय, संभावित बदलावों की पहले से निगरानी की जानी चाहिए।

भारत सरकार और मौसम विभाग की तैयारियों पर भी नजर

भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जुलाई 2026 में संसद में बताया था कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अल नीनो की स्थिति अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान और मजबूत हो सकती है तथा यह बहुत मजबूत श्रेणी तक पहुंच सकती है। साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया कि इसके वास्तविक प्रभाव कई समुद्री और वायुमंडलीय कारकों पर निर्भर करेंगे।

सरकार के अनुसार, IMD लगातार समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों की निगरानी कर रहा है तथा मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियां जारी करता है।

सुपर अल नीनो’ शब्द को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य

भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘सुपर अल नीनो’ विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) या IMD द्वारा आधिकारिक रूप से परिभाषित कोई अलग श्रेणी नहीं है। मौसम वैज्ञानिक सामान्यतः अल नीनो की तीव्रता को कमजोर, मध्यम, मजबूत या बहुत मजबूत जैसी श्रेणियों में समझते हैं।

सोजत-पाली सहित राजस्थान के लिए क्या मायने?

राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता, जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियां पहले से ही महत्वपूर्ण विषय हैं।

संभावित जलवायु जोखिमों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर निम्न तैयारियां उपयोगी हो सकती हैं:

* जल संरक्षण और वर्षाजल संचयन को बढ़ावा देना।

* किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराना।

* पशुओं के लिए चारा और पेयजल की अग्रिम व्यवस्था।

* गर्मी और लू से बचाव के लिए जनजागरूकता।

* जंगलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आग की रोकथाम और निगरानी।

ध्यान रहे: वैज्ञानिकों की चेतावनी संभावित जोखिमों को लेकर है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि सोजत या पाली में निश्चित रूप से सूखा अथवा असाधारण गर्मी आएगी।

चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी, घबराने की नहीं

180 से अधिक वैज्ञानिकों की अपील का मुख्य संदेश यही है कि जलवायु संबंधी संभावित बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय पहले से तैयारी की जाए।

यदि 2026-27 में अल नीनो अत्यधिक मजबूत रूप लेता है, तो भारत के प्राकृतिक संसाधनों, कृषि और ग्रामीण समुदायों पर इसके प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिक निगरानी और प्रशासनिक तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।

सोजत न्यूज़ का संदेश: जल बचाएं, पर्यावरण बचाएं और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें।

स्रोत और तथ्य-जांच

यह खबर 16 सितंबर 2026 को प्रकाशित वैज्ञानिक अपील, 19 सितंबर की मीडिया रिपोर्टों और भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

वैज्ञानिकों की मूल अपील

India Today रिपोर्ट

सोजत न्यूज़ — सच कहने का दम वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

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