सोजत: “पुण्य कर्मों से ही संत दर्शन का सौभाग्य मिलता है” संत माधवदास जी।

अकरम ख़ान
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अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत। कृषि मंडी रोड पर चल रहे 11 दिवसीय सत्संग कार्यक्रम सोमवार को विधिवत सम्पन्न हुआ ।

कबीरपंथी संप्रदाय के संत माधवदास जी महाराज ने अपने प्रवचनों में संत दर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में जब पुण्य कर्मों का सूर्योदय होता है, तभी उसे परम सौभाग्य से किसी साधु या संत के दर्शन होते हैं।
संत दर्शन में न करें अभिमान
संत माधवदास जी महाराज ने कबीर साहेब के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा, “वही दिन सबसे अच्छा होता है जिस दिन साधु मिल जाएं, भले ही वह कोई भी दिन हो।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि संत दर्शन करने में कोई भी बहाना न बनाएं और अपने अभिमान (घमंड) को त्याग कर तुरंत दर्शन करने चाहिए।

उन्होंने दोहे के माध्यम से समझाया:
संत दर्शन को चालिए तज माया अभिमान, ज्यों ज्यों पैर आगे रखे, त्यों त्यों यज्ञ समान। यानी, जैसे-जैसे आप संत की ओर कदम बढ़ाते हैं, हर कदम एक यज्ञ के समान पुण्य देता है।

महाराज ने संतों की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो भूले-भटके, भ्रमित और असहाय जनों को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, तथा जिज्ञासुओं के हृदय में भक्ति और ज्ञान की सुधा (अमृत) सिंचित करते हैं, वही सच्चे साधु या संत होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा और प्राणी मात्र के हित के लिए साधुजनों ने हमेशा स्वयं को न्योछावर कर दिया है।

इस अवसर पर आगंतुक संतजनों का आयोजन समिति द्वारा माल्यार्पण कर भावभीना अभिनंदन किया गया।


इस अवसर पर संत झुपर दास जी, संत भीवदास जी और सुमरन साहब जी ने भी प्रवचन दिए, जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

सत्संग में सोहनलाल, प्रभु लाल, ओम पाराशर, मांगीलाल, राजेंद्र कुमार, मधुराम, रमेश कुमार, दिनेश कुमार, दुर्गाराम, भंवरलाल, श्यामलाल गहलोत, पुनाराम, प्रियंका सांगला, गीता सांखला, शोभा सांखला, सुमन, सोहनी, शांति देवी, लीला पालरिया और कुमकुम, पपिया देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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