✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा


बालोतरा, 17 नवम्बर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर व्यक्ति का डिजिटल आभा आईडी कार्ड (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) बनाया जा रहा है। इस पहल के तहत अस्पताल में इलाज के लिए अब बार-बार पर्ची साथ ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। आभा कार्ड के जरिए मरीज की बीमारी और पूर्व इलाज का पूरा रिकॉर्ड डॉक्टर के पास होगा।
आधार से जुड़ेगा मेडिकल डेटा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वांकाराम चौधरी ने बताया कि यह आभा कार्ड 14 अंकों का होगा, जिसे आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा। इसमें मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और उपचार से जुड़ा डेटा दर्ज होगा। डॉक्टर इस डेटा को देखकर मरीज के लिए उचित दवा और इलाज निर्धारित कर सकेंगे।
आशा और एएनएम बना रही हैं आईडी
जिला कार्यक्रम अधिकारी विजय सिंह ने जानकारी दी कि आशा सहयोगिनी और एएनएम घर-घर जाकर डिजिटल आभा कार्ड बना रही हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर इन्हें प्रशिक्षित किया गया है। आशा वर्कर्स लाभार्थियों का डेटा रजिस्टर में दर्ज कर रही हैं, जिसमें नाम, उम्र, आधार संख्या, मोबाइल नंबर और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी शामिल है।
घर बैठे ऐसे बनाएं आभा कार्ड
यदि आपके पास एंड्रॉइड मोबाइल या लैपटॉप है तो आप खुद भी आभा कार्ड बना सकते हैं।
1. गूगल पर https://abha.abdm.gov.in पर जाएं।
2. “क्रिएट आभा नंबर” पर क्लिक करें।
3. आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस विकल्प चुनें।
4. आधार कार्ड नंबर और मोबाइल नंबर भरकर वेरिफाई करें।
5. पीडीएफ डाउनलोड कर प्रिंट निकालें।
लोगों को मिलेगी बड़ी सुविधा
डॉ. वांकाराम चौधरी ने बताया कि आभा कार्ड के माध्यम से डॉक्टर आसानी से मरीज की मेडिकल हिस्ट्री देख सकेंगे। इससे दवाओं का दोहराव और गलत इलाज की संभावना खत्म होगी। यह योजना केंद्र सरकार की ओर से निशुल्क चलाई जा रही है और सभी जिलों में लागू की जा रही है।
आशा व एएनएम के सहयोग से नंबर घर-घर पहुंच रहा
आशा सहयोगिनी और एएनएम लाभार्थियों के घरों पर जाकर नंबर अंकित कर रही हैं। लोगों से अपील है कि वे इस कार्य में सहयोग करें।
सरकार की यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल क्रांति लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।