अटल बिहारी वाजपेयी, भारतीय राजनीति के वह महानायक थे जिनके साहसिक फैसले देश के विकास की कहानी को नई ऊंचाइयों पर ले गए। उनका कार्यकाल कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा, जिनमें से तीन बड़े फैसले राजस्थान के लिए वरदान साबित हुए। पोखरण में परमाणु परीक्षण, राजस्थान के रावतभाटा परमाणु बिजली घर का विकास, और जयपुर-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे का निर्माण ऐसे फैसले थे जिन्होंने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। आइए, इन तीन महत्वपूर्ण निर्णयों पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी के तीन ऐतिहासिक फैसले, जिनसे राजस्थान का बढ़ा ओहदा
1. पोखरण में परमाणु परीक्षण: परमाणु शक्ति का प्रतीक
11 मई से 13 मई 1998, यह तिथियां राजस्थान और भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं। इन्हीं दिनों में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जैसलमेर के पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुए। यह निर्णय भारत को विश्व पटल पर परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों की श्रेणी में ला खड़ा करने वाला था।
अटल बिहारी वाजपेयी ने इस कठिन और साहसिक कदम को उठाने के लिए अपने पूरे राजनीतिक जीवन को दांव पर लगा दिया। पोखरण को इस परीक्षण के लिए चुना गया, क्योंकि यह स्थान दूरस्थ और भूगर्भीय संरचनाओं के लिए उपयुक्त था।
इस परीक्षण में वैज्ञानिकों की एक बड़ी टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का भी अहम योगदान था। इस परीक्षण ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित किया। इसके साथ ही, राजस्थान के पोखरण को ‘परमाणु नगरी’ के रूप में पहचान मिली।
2. रावतभाटा परमाणु बिजली घर: विज्ञान का मंदिर
8 मार्च 2001 को, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राजस्थान के रावतभाटा में परमाणु बिजली घर की चौथी इकाई का उद्घाटन किया। यह निर्णय राजस्थान और देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।
इस अवसर पर वाजपेयी ने रावतभाटा परमाणु बिजली घर को ‘विज्ञान का मंदिर’ कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाएगी।
इस दौरे के दौरान, सुरक्षा कारणों से भाजपा कार्यकर्ता संयंत्र स्थल पर नहीं आ सके। ऐसे में, वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का मान रखते हुए संयंत्र स्थल के बाहर आमसभा को संबोधित किया। यह उनके नेतृत्व की वह खासियत थी, जो उन्हें जनता के दिलों के करीब लाती थी।
3. जयपुर-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे: स्वर्णिम चतुर्भुज का हिस्सा
राजस्थान के लिए अटल बिहारी वाजपेयी का एक और बड़ा योगदान था जयपुर-किशनगढ़ 6-लेन एक्सप्रेसवे का निर्माण। यह परियोजना वाजपेयी जी की महत्वाकांक्षी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य देश को बेहतरीन सड़कों के माध्यम से जोड़ना था।
जयपुर-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे भारत का दूसरा 6-लेन हाईवे था, जिसे 615 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया। इसका उद्घाटन 23 मई 2005 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया। यह एक्सप्रेसवे राजस्थान में यातायात और परिवहन को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। इसने क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दिया और विकास की गति को तेज किया।
अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शिता और नेतृत्व
इन तीन ऐतिहासिक फैसलों ने न केवल राजस्थान को नई पहचान दी, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। पोखरण में परमाणु परीक्षण ने भारत को वैश्विक मंच पर एक शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया। रावतभाटा परमाणु बिजली घर ने ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया। वहीं, जयपुर-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे ने राजस्थान के बुनियादी ढांचे को नई दिशा दी।
अटल बिहारी वाजपेयी का नेतृत्व भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी दूरदर्शिता और साहसिक फैसले आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। राजस्थान में उनके योगदान ने राज्य को एक नई पहचान दी और इसे विकास के पथ पर अग्रसर किया। उनका नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।