सोजत: नन्ही रोजेदार 8 वर्षीय माहिरा वल्द मरहूम मोहम्मद सिराज(शेरू) ने रखा पहला रोजा, अपने मरहूम वालिद के लिए कि दुआएं।

अकरम ख़ान
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अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत। मुस्लिम समाज का सबसे पवित्र और रहमतों भरा महीना रमजान इन दिनों पूरे जोश, उत्साह और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। इस मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग रोजे रखकर इबादत में मशगूल हैं, वहीं नन्हे बच्चे भी अपनी पाक नीयत और धार्मिक लगन से सभी का दिल जीत रहे हैं।

इसी क्रम में सोजत के मौहल्ला सिलावटान निवासी जनाब अब्दुल जब्बार साहब की पोती एवं मरहूम जनाब मोहम्मद सिराज (शेरु भाई) की पुत्री, महज 8 वर्षीय माहिरा बानो ने इतनी छोटी उम्र में अपना पहला रोजा रखकर गहरी धार्मिक आस्था और पारिवारिक संस्कारों का सुंदर परिचय दिया। नन्ही माहिरा के इस जज्बे और लगन की परिवार सहित पूरे मोहल्ले एवं परिचितों ने सराहना की।

माहिरा के बड़े पापा जनाब मोहम्मद समद और मोहम्मद सरफराज तथा चाचा मोहम्मद शहजाद ने बताया कि उनके भाई मो. सिराज (शेरु) के अचानक इंतकाल के बाद परिवार अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था। ऐसे में नन्ही माहिरा ने पहला रोजा रखकर दादा जनाब अब्दुल जब्बार साहब और दादी शमीम बानो सहित पूरे परिवार को गम के बीच खुशी के कुछ पल दिए। परिवार ने माहिरा के हौसले और जज्बे के लिए दुआएं मांगीं।

बताया गया कि माहिरा अल सुबह परिवार के साथ उत्साहपूर्वक उठी और सेहरी की। इसके बाद पूरे दिन सब्र और अनुशासन के साथ रोजा रखते हुए नमाज अदा की और इबादत में समय बिताया।

मात्र 8 वर्ष की बच्ची माहिरा शेरु सिलावट की यह लगन परिवार और परिचितों के लिए खुशी और गर्व का सबब बन गई है।

शाम को जैसे ही इफ्तार का वक्त हुआ, पूरे परिवार ने मिलकर माहिरा का पहला रोजा खुलवाया। इस मौके पर माहिरा ने अपने मरहूम वालिद के लिए खास दुआ भी की।

खुशी के इस अवसर पर परिवारजनों ने मोहल्ले और रिश्तेदारों में मिठाई बांटकर खुशियां साझा कीं तथा माहिरा के उज्ज्वल भविष्य, अच्छी सेहत और कामयाबी के लिए दुआएं मांगीं।

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