✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
प्रयागराज में इतिहास रचकर समाप्त हुआ महाकुंभ, श्रद्धालु बोले- अविस्मरणीय अनुभव
144 साल बाद आयोजित हुए विशेष महाकुंभ ने आस्था, भक्ति और भव्यता की नई ऊंचाइयों को छुआ। दुनिया ने ऐसा धार्मिक आयोजन पहले कभी नहीं देखा, जहां हर स्तर पर महारिकॉर्ड बने और श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ी। यह महाकुंभ धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से ऐतिहासिक बन गया, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।
महाकुंभ में बने 8 महारिकॉर्ड, दुनिया कर रही सराहना
★ महारिकॉर्ड-1 : श्रद्धालु संख्या में ऐतिहासिक कीर्तिमान
अमेरिका की आबादी से दोगुनी संख्या में 64 करोड़ श्रद्धालु महाकुंभ पहुंचे। दुनियाभर से लोग इस आयोजन का हिस्सा बनने आए, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा बन गया।
★ महारिकॉर्ड-2 : इन्फ्रास्ट्रक्चर का विशाल विस्तार
महाकुंभ क्षेत्र 4,000 हेक्टेयर में फैला था, जो दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम से 160 गुना बड़ा है। यह एक अस्थायी शहर जैसा बन गया, जिसमें हर जरूरी सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया।
★ महारिकॉर्ड-3 : कुंभ सिटी की भव्यता
महाकुंभ के दौरान 4 लाख से अधिक तंबू और 1.5 लाख टॉयलेट बनाए गए, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा अस्थायी शहर बन गया। इस विशाल व्यवस्था ने हर श्रद्धालु को रहने और स्वच्छता की सुविधाएं प्रदान कीं।
★ महारिकॉर्ड-4 : ट्रांसपोर्टेशन का अद्वितीय प्रबंधन
महाकुंभ के दौरान 13,830 ट्रेनों से 30.2 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इतना ही नहीं, 2,800 से अधिक फ्लाइट्स प्रयागराज पहुंचीं, जिनमें 4.5 लाख यात्रियों ने सफर किया। इस अद्वितीय व्यवस्था ने यह साबित कर दिया कि भारत अब अत्याधुनिक लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन प्रबंधन में किसी से पीछे नहीं है।
★ महारिकॉर्ड-5 : अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
इतनी विशाल भीड़ को संभालने के लिए 50,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। महाकुंभ स्थल पर 2,700 कैमरों से निगरानी रखी गई, जिससे यह आयोजन पूरी तरह सुरक्षित रहा।
★ महारिकॉर्ड-6 : स्वास्थ्य सुविधाओं की मिसाल
मेला क्षेत्र में 43 अस्पताल स्थापित किए गए, जिनमें 6 लाख से अधिक लोगों का इलाज किया गया। चिकित्सा सुविधा इतनी सुदृढ़ थी कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीम हर समय तैनात रही।
★ महारिकॉर्ड-7 : स्वच्छता अभियान बना उदाहरण
महाकुंभ क्षेत्र को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए 4 लाख डस्टबिन लगाए गए। 11 हजार से अधिक सफाईकर्मियों ने दिन-रात मेहनत की। हर 25 मीटर की दूरी पर डस्टबिन की व्यवस्था थी, जिससे कुंभ क्षेत्र को दुनिया का सबसे स्वच्छ धार्मिक आयोजन बनाया जा सका।
★ महारिकॉर्ड-8 : आर्थिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक महाकुंभ
महाकुंभ ने व्यापार और अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त गति दी। अनुमान के अनुसार, इस दौरान मेला क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन हुए, जिससे स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों और पर्यटन उद्योग को बड़ा फायदा हुआ।
दुनिया कर रही भारतीय आयोजन क्षमता की सराहना
इस ऐतिहासिक महाकुंभ के आयोजन ने दुनिया को भारतीय प्रशासनिक कौशल और धार्मिक समर्पण का परिचय दिया। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देशों ने इस आयोजन की प्रशंसा की और इसे दुनिया का सबसे बड़ा और अनुशासित धार्मिक आयोजन करार दिया।
महाकुंभ भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन यह आयोजन सदियों तक याद रखा जाएगा। श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा को अपने जीवन का सबसे दिव्य अनुभव मान रहे हैं। अब पूरी दुनिया अगले महाकुंभ का इंतजार कर रही है, जो एक और नया इतिहास रचेगा!