सोजत न्यूज़ | 18 अक्टूबर 2026
सोजत सिटी। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर माता रानी के भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा है। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को सुबह सप्तमी तिथि के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है। पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि सुबह लगभग 8:27 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। हालांकि, अष्टमी की मुख्य पूजा और कन्या पूजन की तिथि को लेकर अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं। इस वर्ष महाअष्टमी और महानवमी का प्रमुख पर्व 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भक्त माता रानी से परिवार की खुशहाली, अच्छी सेहत, सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
आज किस माता की पूजा करें?
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। रविवार सुबह सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने के कारण आज सप्तमी की परंपरा के अनुसार मां कालरात्रि की पूजा भी की जा सकती है। सुबह लगभग 8:27 बजे के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय से मुक्ति देने वाली और संकटों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। मां का स्वरूप भले ही उग्र है, लेकिन वे अपने भक्तों के प्रति कल्याणकारी और दयालु मानी जाती हैं।
मां कालरात्रि से प्रार्थना करें कि वे सभी भक्तों के जीवन से भय, नकारात्मकता और संकट दूर करें तथा परिवार में सुख-शांति बनाए रखें।
मां कालरात्रि को कौन-सा भोग लगाएं?
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार निम्नलिखित भोग अर्पित कर सकते हैं।
– गुड़: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई अर्पित करने की मान्यता है।
– फल: केला, सेब और अन्य मौसमी फल चढ़ा सकते हैं।
– नारियल: माता रानी को नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
– शुद्ध जल: पूजा के दौरान स्वच्छ जल अर्पित करें।
– सात्विक प्रसाद: अपनी श्रद्धा के अनुसार हलवा, मिठाई या अन्य सात्विक प्रसाद तैयार कर सकते हैं।
भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटें। पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
मां रानी किस बात से प्रसन्न होती हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता रानी की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल भोग और पूजा ही नहीं, बल्कि अच्छे कर्म और निर्मल मन भी महत्वपूर्ण हैं।
1. सच्चे मन से पूजा-अर्चना करें: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता रानी के सामने दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और दुर्गा चालीसा या मां कालरात्रि के मंत्रों का पाठ करें।
2. किसी का दिल न दुखाएं: दूसरों के प्रति प्रेम, दया और सम्मान का भाव रखें। जरूरतमंदों की सहायता करें और असहाय लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करें।
3. कन्याओं का सम्मान करें: नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा है। छोटी बच्चियों को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान करें और सामर्थ्य के अनुसार भोजन या उपहार दें।
4. भूखे और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं: अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों, जरूरतमंदों और असहाय लोगों की सहायता करें।
5. क्रोध और अहंकार से बचें: मन में सकारात्मक विचार रखें और परिवार में प्रेम तथा सद्भाव बनाए रखने का प्रयास करें।
6. घर में शांति और पवित्रता बनाए रखें: पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार माता रानी की आराधना करें।
इन कार्यों को धार्मिक आस्था के साथ पुण्यकारी माना जाता है। सच्ची भक्ति का अर्थ दूसरों के प्रति करुणा और सद्भाव रखना भी है।
मां कालरात्रि का मंत्र
माता रानी की पूजा के समय इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप कर सकते हैं।
मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार किया जा सकता है।
जाप के दौरान मन को शांत रखें और माता रानी से परिवार की सुख-शांति, सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना करें।
आज भक्तों को क्या करना चाहिए?
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्त सुबह स्नान करके माता रानी की पूजा करें। मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं और दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इसके साथ ही अष्टमी तिथि प्रारंभ होने के बाद मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की तैयारी भी कर सकते हैं।
माता रानी के भक्तों के लिए यह समय आत्मचिंतन, सेवा और सद्भाव का संदेश देता है। यदि कोई व्यक्ति व्रत रख रहा है, तो उसे अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए।
मां महागौरी की पूजा कब होगी?
इस वर्ष सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को महाअष्टमी और महानवमी से जुड़े प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान मनाए जाएंगे। अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा, कन्या पूजन और हवन की परंपरा है। तिथि और पूजा के मुहूर्त में स्थानीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए कन्या पूजन या हवन का निश्चित समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।
माता रानी से विशेष प्रार्थना
हे मां कालरात्रि! अपने सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखना। सभी के जीवन से भय और निराशा दूर करना। परिवारों में सुख-शांति, प्रेम और सद्भाव बनाए रखना। जो लोग परेशानियों से जूझ रहे हैं, उन्हें साहस और सही मार्ग पर चलने की शक्ति देना। गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने की भावना सभी के मन में जगाना।
जय माता दी! जय मां कालरात्रि!
सोजत न्यूज़ की ओर से सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
शारदीय नवरात्रि आज विशेष: मां कालरात्रि की पूजा के बाद अष्टमी तिथि का शुभारंभ, जानिए माता रानी को कौन-सा भोग लगाएं और कैसे पाएं मां का आशीर्वाद
माता रानी की आराधना से घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना, जरूरतमंदों की सेवा और कन्याओं का सम्मान करने से मिलता है पुण्य
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