बगड़ी नगर, राजस्थान।
लोक देवता बाबा रामदेव जी के प्रति अटूट आस्था और विश्वास को लेकर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बगड़ी नगर से श्रद्धालुओं का जत्था रामदेवरा (रुणिचा) के लिए पैदल यात्रा पर रवाना हुआ। गजेंद्र प्रजापत के नेतृत्व में सैंकड़ों भक्तों ने कल शाम बगड़ी नगर से यात्रा प्रारंभ की, जो साणडिया, सोजत सिटी और आसपास के गांवों से होते हुए रामदेवरा पहुंचेगा।
श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा रामदेव जी का दर्शन करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। इस यात्रा में भक्तगण हाथों में पचरंगी ध्वज लेकर “जय बाबा री” के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यात्रा में अब तक 150 से अधिक जातरु शामिल हो चुके हैं और संख्या निरंतर बढ़ रही है।
देशभर से उमड़ रही है आस्था की भीड़
गजेंद्र प्रजापत ने बताया कि रामदेवरा मेला केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु, मद्रास, पंजाब, कोलकाता, अहमदाबाद और देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए हर वर्ष आते हैं। बाबा को धोक लगाकर वे अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं, जो पूर्ण भी होती हैं। यही कारण है कि बाबा रामदेव जी को लोक देवता कहा जाता है और हर जाति-धर्म के लोग उनकी भक्ति में लीन होते हैं।
भंडारों और सेवा शिविरों की विशेष व्यवस्था
पुनाराम प्रजापत, जो कि रामदेवरा लाइव चैनल से जुड़े हुए हैं, ने जानकारी दी कि अब तक लगभग 35 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा रामदेव जी के दर्शन कर चुके हैं। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा रेल और बस सेवाओं में विशेष प्रबंध किए गए हैं। जगह-जगह भंडारे, पेयजल स्टॉल, चिकित्सा शिविर और अस्थायी विश्राम गृहों की व्यवस्था की गई है।
भामाशाहों द्वारा सेवा के लिए अपनी मेहनत की कमाई लगाई जा रही है। राम रसोड़ा जैसे संगठनों और सेवा समूहों द्वारा आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भरपूर भोजन और पानी की व्यवस्था की गई है। यह सेवा कार्य पुण्य अर्जन के रूप में देखा जा रहा है।
समाजसेवियों ने दी शुभकामनाएं
कुकाराम मेघवाल, खरताराम प्रजापत, किरण भाई, मोडाराम मेहसन, देवाराम मेघवाल, अशोक गोदारा, समंदर गर्ग और नंदकिशोर जी (चारभुजा मंदिर पुजारी) सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जातरु यात्रियों को शुभकामनाएं दीं और यात्रा की मंगल सफलता की कामना की।
संपूर्ण राजस्थान में आस्था का पर्व
रामदेवरा मेला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह राजस्थान की लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। यह मेला जात-पात, ऊंच-नीच से परे हर व्यक्ति को एक समान भाव से जोड़ता है। बाबा रामदेव जी का संदेश “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” इस यात्रा में जीवंत नजर आता है।