सोजत। क्षेत्र में पिछले आठ महीनों के दौरान आधा दर्जन से अधिक आत्महत्याओं की घटनाओं ने समाज को गहरी चिंता में डाल दिया है। फंदे पर लटकने, विषाक्त पदार्थों के सेवन और जलसमाधि जैसे आत्मघाती कदमों से पूरा क्षेत्र मानसिक रूप से व्यथित है।
इसी गंभीर विषय पर सोमवार को उम्मेद गौशाला, सोजत में सोजत महोत्सव समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पार्षद जोगेश ‘लक्की’ जोशी ने आत्महत्याओं की बढ़ती प्रवृत्ति पर चर्चा छेड़ते हुए सभी का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।
समिति ने चलाने का लिया संकल्प
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एक माह तक जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत नागरिकों को आत्मघाती कदम से रोकने, परिवारों को मानसिक रूप से सजग बनाने और युवाओं को सही मार्गदर्शन देने के प्रयास किए जाएंगे।
समिति ने नागरिकों से अपील की कि—
परिवार में संवाद बनाए रखें, विशेषकर युवाओं के साथ।
एकाकीपन, चुपचाप रहना, अचानक व्यवहार में बदलाव जैसे संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें।
मादक पदार्थों से दूरी और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण रखें।
बच्चों पर अनावश्यक पढ़ाई का दबाव न डालें।
लंबे समय तक उदासी रहने पर मनोचिकित्सक से सलाह लें।
विशेषज्ञों की राय
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति कई कारणों से जुड़ी हो सकती है, जैसे—
पूर्व आत्महत्या का प्रयास,
पारिवारिक इतिहास,
दीर्घकालिक तनाव या व्यक्तिगत संकट (रिश्तों की समस्या, नौकरी खोना, किसी प्रियजन की मृत्यु)।
उन्होंने कहा कि यदि लगता है कि कोई प्रियजन संघर्ष कर रहा है तो उससे खुलकर बात करें और पूछने से न डरें कि क्या वह आत्महत्या के बारे में सोच रहा है। समर्थन दें और आवश्यक हो तो विशेषज्ञ की सलाह लें।
बैठक में रहे उपस्थित
बैठक में भामाशाह अनोपसिंह लखावत, पेंशनर्स समाज अध्यक्ष लालचंद मोयल, सोजत सेवा मंडल मंत्री पुष्पत राज मुणोत, वरिष्ठ नागरिक समिति सदस्य सत्यनारायण गोयल, हितेंद्र व्यास, अभिनव कला मंच सचिव चेतन व्यास, उपाध्यक्ष श्यामलाल व्यास, भारत विकास परिषद के रामस्वरूप भटनागर, ताराचंद सैनी, मानव सेवा समिति अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, सत्तू सिंह भाटी, अशोक सैन,ड़ा रशीद गौरी, राजकुमार चौधरी, जवरीलाल बौराणा, कृष्णा भाटी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
संवेदनशील समाज की ओर कदम
सोजत महोत्सव समिति ने स्पष्ट संदेश दिया कि आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को अब सक्रिय पहल करनी होगी। परिवार, समाज और संस्थाएं मिलकर सजग रहें तो कई कीमती जीवन बचाए जा सकते हैं।