सोजत सिटी । पर्यूषण महापर्व में त्याग तपस्या के द्वारा कर्मों के जन्म जन्मों की निर्जरा की जा सकती है ।
महासती कुमुद प्रभा जी म.सा. ने यह उद्गगार बुधवार प्रातः स्थानीय ओसवाल न्याति नोहरे में आयोजित धर्म सभा में प्रवचन देते हुए प्रकट किए।

इस अवसर पर साध्वी जी ने कहा कि हम दुर्लभ मनुष्य जन्म की कद्र नहीं करते लेकिन इसी के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति संभव है ।
साध्वी सुलेखा जी म.सा. ने बताया कि पर्यूषण तप आराधना करने का उत्तम अवसर है।थोड़े स्वाद के लिए जीवन नष्ट करना ठीक नहीं है ।
इस अवसर पर अपने प्रवचनों में साध्वी निर्मिता जी म.सा. ने कहा कि सुख देने से सुख और दुख देने से दुख की प्राप्ति होती है ,उन्होंने बताया तपस्या करने से इच्छाओं पर अंकुश लगता है।
साध्वी प्रणिता जी म.सा. ने कहा कि हमें भोजन में जमीकंद का त्याग करने के साथ ही रात्रि में भोजन नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए ।
धर्म सभा में प्रकाश बांठिया, दौलत राज बांठिया , नेमीचंद मांडोत , रामलाल श्री श्री माल , पारसमल सिंघवी , सुरेश सुराणा , चेनराज अखावत, बाबूलाल बोहरा , पदम धोका , ललित पगारिया , महावीर श्री श्री माल, विनोद लोढ़ा , राजेश कोरिमुथा , सुनील सुराणा आदि उपस्थित रहे ।