✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
16 दिसंबर 2024 से पौष मास का शुभारंभ हो रहा है, जो 13 जनवरी 2025 तक रहेगा। यह हिन्दी पंचांग का दसवां महीना है और धार्मिक दृष्टि से इसका अत्यधिक महत्व है। पुराणों के अनुसार, इस मास में सूर्य पूजा करने से आयु में वृद्धि होती है। इस महीने में सूर्य को ‘भग’ नाम से पूजा जाता है और इसे स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति प्रदान करने वाला मास माना जाता है।
पौष मास में पूजा और तीर्थ स्नान का महत्व
पौष महीने में गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, शिप्रा और अलकनंदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है। प्रयागराज के संगम में स्नान करना इस मास में विशेष पुण्यदायी माना गया है। साथ ही तीर्थ स्थलों का दर्शन और पूजा-पाठ करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
भगवान विष्णु की नारायण रूप में पूजा और उगते सूर्य को अर्घ्य देना विशेष लाभकारी माना गया है। इस मास में व्रत-उपवास, दान और पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
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कैसे करें सूर्य को अर्घ्य अर्पित?
1. रोज सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद ऐसी जगह जाएं जहां सूर्य के दर्शन हो सकें।
2. तांबे के लोटे में जल भरें। उसमें कुमकुम, चावल और फूल डालें।
3. सूर्य मंत्र जैसे:
ऊँ सूर्याय नमः
ऊँ खगाय नमः
ऊँ भास्कराय नमः का जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।
4. इसके बाद जरूरतमंदों को भोजन, अनाज, धन या गौशाला में दान करें।
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सूर्य पूजा के स्वास्थ्य लाभ
इस समय शीत ऋतु है। पौष मास में रोज सुबह जल्दी उठकर सूर्य की पहली किरण में रहने से स्वास्थ्य लाभ होते हैं।
सूर्य की धूप से विटामिन डी प्राप्त होता है, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
यह त्वचा की चमक बढ़ाने और ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाने में सहायक है।
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पौष मास में धार्मिक उपाय
स्नान के दौरान जल में गंगाजल मिलाएं और तीर्थों का ध्यान करें।
घर पर ही तीर्थ स्नान का पुण्य प्राप्त करने के लिए स्नान के समय पवित्र नदियों का स्मरण करें।
सुबह-सुबह की सूर्य पूजा से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है।
पौष मास में किए गए धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह समय आत्मिक शुद्धि और ईश्वर की भक्ति में लीन होने का स्वर्णिम अवसर है।