✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
अक्सर देखा गया है कि पुलिस पूछताछ के लिए किसी भी मामले में आम नागरिकों को थाने बुलाती है। इस प्रक्रिया में लोगों के मन में डर और घबराहट घर कर जाती है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग बिना वजह अपना समय, पैसा और मानसिक शांति खो बैठते हैं। लेकिन यह जानना बेहद जरूरी है कि कानून आपको कैसे सुरक्षा प्रदान करता है।
धारा 160 CrPC: आपके अधिकारों का संरक्षक
किसी भी पुलिस अधिकारी को यदि आपसे पूछताछ करनी है, तो वह भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 160 के तहत आपको नोटिस भेजने का कानूनी दायित्व रखता है।
नोटिस में निम्नलिखित जानकारी होनी चाहिए:
- पुलिस अधिकारी का नाम और रैंक।
- पूछताछ का समय।
- थाना और अन्य आवश्यक विवरण।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- बिना नोटिस के थाने बुलाना गैरकानूनी है।
- पूछताछ के बाद तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।
- यह नोटिस केवल जांच में सहयोग के लिए होता है, न कि आपको अपराधी घोषित करने के लिए।
घबराने की बजाय अपनाएं ये तरीके:
- नोटिस की मांग करें:
यदि पुलिस आपको फोन पर थाने बुलाती है, तो उनसे धारा 160 CrPC के तहत नोटिस देने को कहें। - वकील के साथ जाएं:
यदि आप थाने जाने का निर्णय लेते हैं, तो अपने साथ एक वकील को लेकर जाएं। - पूछताछ के दौरान व्यवहार:
- पुलिस पूछताछ के दौरान आपको शारीरिक यातना या डराने-धमकाने का प्रयास नहीं कर सकती।
- आपके शरीर को छूना या धमकाना दंडनीय अपराध है।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया:
यदि पुलिस को जांच के दौरान पुख्ता सबूत मिलते हैं और आपको आरोपी मानती है, तो गिरफ्तारी के लिए अलग से प्रक्रिया अपनाई जाती है।
- इसके लिए डीके बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है।
- हर गिरफ्तारी में कानूनी दस्तावेज बनाए जाते हैं।
कानूनी जानकारी का अभाव: एक गंभीर समस्या
अज्ञानता के कारण लोग अक्सर पुलिस की गलत मांगों के आगे झुक जाते हैं और रिश्वत देकर छुटकारा पाने की कोशिश करते हैं। यह न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई का नुकसान भी।
इसलिए:
- अपने कानूनी अधिकारों को जानें।
- संयमित रहें और घबराएं नहीं।
पुलिस पूछताछ एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन इसके दौरान आपके अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। धारा 160 CrPC आपके अधिकारों की रक्षा करता है और आपको अनुचित कार्रवाई से बचाता है।
घबराएं नहीं, डरे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहें और कानून का सहारा लें।