
राजसमंद, राजस्थान:
राजसमंद में मार्बल उद्योग पर मंडरा रहा संकट गहराता जा रहा है। सरकार द्वारा की गई मार्बल रॉयल्टी की बढ़ोतरी के विरोध में पिछले 20 दिनों से जिले का संपूर्ण मार्बल व्यापार ठप पड़ा है। इससे न केवल मार्बल व्यापारी बल्कि ट्रक व ट्रेलर चालक, लोडिंग श्रमिक और अन्य मजदूर भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आय का जरिया ठप हो जाने से जिले के हजारों श्रमिक अब पलायन को मजबूर हो रहे हैं।
व्यापारियों का सरकार को अल्टीमेटम
मार्बल रॉयल्टी में की गई बढ़ोतरी को व्यापारियों ने अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक बताया है। व्यापारियों का कहना है कि इस निर्णय से मार्बल उद्योग की रीढ़ टूटने की कगार पर है। व्यापारियों ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द ही निर्णय वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे।
कल विशाल वाहन रैली और कलेक्ट्री घेराव का ऐलान
बढ़ती नाराजगी के बीच मार्बल व्यापारियों ने 19 अगस्त को राजसमंद में एक विशाल वाहन रैली निकालने का ऐलान किया है। यह रैली जिले के प्रमुख मार्बल क्षेत्रों से निकलते हुए जिला कलेक्ट्री पहुंचकर वहां घेराव करेगी। व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे कलेक्ट्री पर अनिश्चितकालीन पड़ाव डालेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लेती।
तनसुख बोहरा का बयान
मार्बल उद्योग से जुड़े वरिष्ठ व्यवसायी तनसुख बोहरा ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा,
> “हमने अब तक शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया है, लेकिन सरकार ने हमारी सुध लेना तक जरूरी नहीं समझा। अब व्यापारी और मजदूर दोनों ही असहाय महसूस कर रहे हैं। अगर सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन व्यापक रूप लेगा।”
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
मार्बल व्यापार बंद होने से राजसमंद की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। छोटे व्यापारियों से लेकर होटल, ढाबा, डीजल पंप और अन्य सेवा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हैं। इससे आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में है।
क्या है मांग?
व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि सरकार रॉयल्टी बढ़ोतरी को तत्काल प्रभाव से वापस ले और मार्बल उद्योग को राहत प्रदान करे। इसके अतिरिक्त, सरल और स्थायी नीति बनाई जाए जिससे भविष्य में इस प्रकार के आंदोलनों की आवश्यकता न पड
राजसमंद का मार्बल आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। कल की रैली और कलेक्ट्री घेराव से यह तय होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसके व्यापक राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव पड़ सकते हैं।