✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
तारीख: 23 नवंबर 2024, शनिवार
कालभैरव अष्टमी का महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव ने कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। इस दिन को कालभैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। भगवान कालभैरव को तंत्र शास्त्र में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। उनकी उपासना से सभी बाधाओं से मुक्ति और निर्भयता का वरदान प्राप्त होता है।
इस साल कालभैरव अष्टमी 23 नवंबर, शनिवार को मनाई जाएगी। भक्त इस दिन विशेष पूजा, हवन और उपवास के माध्यम से भगवान कालभैरव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
कालभैरव को प्रसन्न करने के 11 विशेष उपाय
1. सुबह की पूजा:
कुश के आसन पर बैठकर भगवान कालभैरव की तस्वीर की पंचोपचार पूजा करें। मंत्र ‘ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:’ का पांच माला जाप करें।
2. भैरव मंदिर की यात्रा:
किसी शांत भैरव मंदिर में जाकर सिंदूर और तेल चढ़ाएं। नारियल, पुए और जलेबी का भोग लगाएं।
3. विशेष मंत्र जाप:
कालभैरव अष्टमी पर इनमें से किसी भी मंत्र का 11 माला जाप करें:
ॐ कालभैरवाय नम:
ॐ भयहरणं च भैरव:
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं
4. सरसों का दीपक:
शाम को भगवान कालभैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर प्रार्थना करें।
5. शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पण:
21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखें और शिवलिंग पर चढ़ाएं।
6. कुत्तों को रोटी खिलाएं:
तेल से चिह्नित रोटी किसी दो रंग वाले कुत्ते को खिलाएं।
7. कर्ज मुक्ति के लिए उपाय:
भगवान शिव की पूजा कर मंत्र ‘ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नम:’ का जाप करें।
8. पकौड़े का दान:
उड़द की दाल के पकौड़े बनाकर सुबह कुत्तों को खिलाएं।
9. जलेबी और कंबल दान:
सवा किलो जलेबी चढ़ाकर गरीबों में बांटें। भिखारी को काला कंबल दान करें।
10. पकवानों का दान:
सरसो के तेल में पकवान बनाकर गरीब बस्ती में बांटें।
11. काले कपड़े का पोटला:
सवा सौ ग्राम काले तिल, काले उड़द और सवा 11 रुपए काले कपड़े में बांधकर भैरव मंदिर में चढ़ाएं।
पूजा के लाभ:
इन उपायों से भगवान कालभैरव प्रसन्न होकर जीवन की सभी बाधाओं को हरते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करें और अपना जीवन सफल बनाएं।