राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: आरक्षण की लॉटरी की तैयारी शुरू, कलेक्टर-एसडीएम निकालेंगे ड्रॉ; सितंबर से नवंबर के बीच होंगे चुनाव

राकेश भटनागर

जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों (एसडीएम/एसडीओ) को पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकालने का अधिकार प्रदान कर दिया है। इसके साथ ही राज्य में सितंबर से नवंबर 2026 के बीच प्रस्तावित पंचायत चुनावों की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।

राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव समय पर संपन्न कराने के लिए आवश्यक तैयारियों में जुट गए हैं। इस बार प्रदेश की 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराए जाने प्रस्तावित हैं। इन चुनावों में लाखों मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों का चयन करेंगे।

5 अगस्त तक आएगी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट

पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर है। आयोग की रिपोर्ट 5 अगस्त तक सरकार को मिलने की संभावना है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार विभिन्न पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण का निर्धारण करेगी और इसके लिए लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।

इसके तहत सरपंच, उपसरपंच, प्रधान, जिला परिषद और पंचायत समिति वार्डों के आरक्षण का निर्धारण लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।

कलेक्टर और एसडीएम की निगरानी में होगी लॉटरी

जारी अधिसूचना के अनुसार, जिला स्तर पर होने वाली लॉटरी की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर के पास होगी, जबकि उपखंड स्तर पर यह प्रक्रिया एसडीओ या एसडीएम की निगरानी में पूरी की जाएगी।

संभावित व्यवस्था के अनुसार—

जिला परिषद वार्डों और प्रधान पद के आरक्षण की लॉटरी जिला मुख्यालय पर जिला कलेक्टर की देखरेख में निकाली जाएगी।

पंचायत समिति वार्ड, ग्राम पंचायत वार्ड, सरपंच और उपसरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी संबंधित उपखंड मुख्यालय पर एसडीएम/एसडीओ की निगरानी में आयोजित होगी।

चुनावी गतिविधियां होंगी तेज

आरक्षण की लॉटरी के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियां और तेज हो जाएंगी। संभावित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी रणनीति बनाने में जुट जाएंगे, वहीं प्रशासन भी मतदाता सूची, मतदान केंद्रों और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

ग्रामीण राजनीति में बढ़ेगी हलचल

पंचायत चुनावों की घोषणा और आरक्षण प्रक्रिया शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। सरपंच, प्रधान और जिला परिषद सदस्य बनने के इच्छुक दावेदारों की नजर अब आरक्षण की लॉटरी पर टिकी हुई है। लॉटरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी पंचायत, वार्ड और पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होंगे।

राजस्थान के आगामी पंचायत चुनाव प्रदेश की ग्रामीण सरकारों के गठन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब सभी की निगाहें 5 अगस्त को आने वाली ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली आरक्षण लॉटरी पर टिकी हैं।

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