✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
जयपुर: राजस्थान के जनजाति क्षेत्रों में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। चित्तौड़गढ़ समेत राज्य के नौ जनजाति जिलों में कैश क्रॉप यानी व्यावसायिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार विशेष योजना लागू कर रही है। इस योजना के तहत किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा और लौकी व भिंडी सहित छह अन्य प्रकार की सब्जियों की खेती के लिए 2,000 मिनी किट मुफ्त वितरित की जाएंगी। इससे किसानों को वर्षभर आय का स्रोत मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
बिना केमिकल उगाई जाएंगी सब्जियां
राज्य सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (TAD) और उद्यानिकी विभाग के संयुक्त प्रयास से किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को जैविक बीजों के साथ जैविक खाद भी मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान बिना केमिकल का उपयोग किए स्वस्थ और प्राकृतिक सब्जियों का उत्पादन कर सकें।
मार्च से पहले मिलेंगे बीज और जैविक खाद
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जायद फसल की खेती के लिए 15 फरवरी के बाद अनुकूल समय होता है। इसलिए किसानों को मार्च से पहले ही बीज और जैविक खाद उपलब्ध कराई जाएगी। इससे किसान समय पर खेती शुरू कर सकेंगे और बेहतर उत्पादन ले सकेंगे।
जैविक खेती से पलायन रोका जाएगा
उद्यानिकी विभाग, चित्तौड़गढ़ के उपनिदेशक डॉ. शंकरलाल जाट ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजाति किसानों को व्यावसायिक खेती से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है। जैविक खेती को अपनाने से न केवल उनकी आमदनी में वृद्धि होगी बल्कि इससे क्षेत्र में पलायन को भी रोका जा सकेगा। कैश क्रॉप अपनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय स्तर पर ही किसानों को पर्याप्त आय के स्रोत मिल सकेंगे।
छोटी जोत के किसानों को मिलेगा लाभ
यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद होगी, जिनके पास छोटी जोत की जमीन है। सरकार ने इस योजना के तहत पात्रता तय की है कि किसान के पास कम से कम 0.05 हेक्टेयर (500 वर्ग मीटर) भूमि और सिंचाई की सुविधा होनी चाहिए। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनके लिए सब्जी की खेती करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
राज्य सरकार की नई पहल से उम्मीदें बढ़ीं
राजस्थान सरकार के इस कदम से छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। जैविक खेती को बढ़ावा देने से स्वास्थ्यवर्धक सब्जियों का उत्पादन भी बढ़ेगा, जिससे स्थानीय और बाहरी बाजारों में मांग में इजाफा होगा। किसानों को इस योजना से जुड़ने और आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रशिक्षित भी किया जाएगा।
सरकार के प्रयासों से किसानों की बदलेगी तस्वीर
राज्य सरकार के इस फैसले से न केवल किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी बल्कि जैविक खेती के कारण मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी। इससे लंबे समय में खेती अधिक लाभकारी साबित होगी और किसानों का रुझान जैविक खेती की ओर बढ़ेगा।